Rajeev kumar

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लेखनी कहानी -21-Sep-2022

रात का चढ़ता नशा 
और दिन उतरता खुमार 
बुढ़ापे के मौज़ों में तब्दील हो गई 
जवानी की  फसले बहार 
साहिल से आ पड़ा वास्ता 
तो छूट गई पीछे मझधार 
खुद को मज़िल तक लाने में 
खुद से कर बैठे यलगार .

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11 Comments

Mithi . S

24-Sep-2022 06:10 AM

Nice post

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Sushi saxena

23-Sep-2022 10:50 AM

Nice

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Chirag chirag

22-Sep-2022 11:48 PM

Beautiful

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